• Tue. Jan 20th, 2026

पीएम मोदी को चिराग ने दी धमकी, चाचा पारस को बनाया मंत्री तो जाऊंगा कोर्ट

ByMedia News

Jul 6, 2021

पटना (बिहार)। लोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने मंगलवार को सीधे पीएम नरेंद्र मोदी को चुनौती दी है। चिराग ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि एलजेपी कोटे से निष्कासित सांसद पशुपति पारस को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, तो मैं कोर्ट जाऊंगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष मैं हूं, पार्टी भी मेरी है। समर्थन भी मेरे पास है। मेरी अनुमति के बिना, पार्टी के कोटे से किसी भी सांसद को मंत्री बनाना गलत है।

चिराग पासवान ने यह भी कहा कि विवाद के बीच अगर ऐसे सांसद को मंत्री बनाया जाता है, जिसे पार्टी निकाल चुकी है तो यह गलत होगा। मुझे नहीं लगता कि पीएम मोदी ऐसा करेंगे। अगर ऐसा हुआ तो मैं राजनीतिक और कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार हूं। अगर चाचा पशुपति पारस को मंत्री बनाना है, तो जदयू में शामिल करके बनाएं, लेकिन एलजेपी के नाम पर नहीं।

उन्होंने ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सबसे पहली टूट जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में होगी। नीतीश कुमार की सरकार डेढ़-दो साल से ज्यादा नहीं चलेगी। रामविलास के विचारों को कुचलते हुए जिन लोगों ने अलग गुट बनाया, उन्हें तुरंत निष्कासित किया गया है। उनकी प्राथमिक सदस्यता भी खत्म की गई है। चुनाव आयोग को भी इसकी जानकारी दी गई है। पार्टी के नाम पर उन्होंने आयोग में कोई दावा नहीं किया है। खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष भी नहीं बताया है।

चिराग ने लोजपा में टूट के सवाल पर कहा कि अलग गुट बनाकर चाचा और बागियों ने रामविलास पासवान के विचारों को कूचला है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कुल 75 सदस्य हैं। इसमें 66 सदस्य हमारे साथ हैं। सभी का ऐफिडेविट भी हमारे पास है। इस बात पर मैं चुनाव आयोग और कोर्ट, दोनों ही जगहों पर चुनौती दे सकता हूं। क्योंकि, चाचा पशुपति कुमार पारस के पास कोई ठोस आधार नहीं है। उन्होंने पटना में चुपके से बैठक कर खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर तो दिया, लेकिन इस बारे में चुनाव आयोग में कोई क्लेम नहीं किया और न ही खुद को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बताया। सिर्फ वो जनता को दिग्भ्रमित कर रहे हैं। उन्हें मैं चुनौती देता हूं कि वो मुझे गलत साबित करें। चाचा को जवाब तो हाजीपुर की जनता देगी।

प्रेस कांफ्रेंस में चिराग पासवान ने बिहार के विकास पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि ये किस तरह का विकास हुआ है। जहां एक ऐसा हॉस्पिटल नहीं कि राज्य के मुख्यमंत्री अपना इलाज करा सकें। उन्हें चार्टड प्लेन से दिल्ली जाकर अपना इलाज कराना पड़ता है। वहां उन्हें 9 दिन रहना पड़ता है। ये रोजगार और IT सेक्टर के डेवपमेंट पर कोई बात नहीं करते हैं। अभी किसी प्रकार के चुनाव का वक्त नहीं, फिर भी जोड़-तोड़ के समीकरण में लगे हैं। इनकी उल्टी गिनती शुरू हो गई है। डेढ़-दो साल से ज्यादा इनकी बिहार में इनकी सरकार नहीं चलेगी। जैसे ही केंद्र में मंत्रिमंडल का विस्तार होगा, उसके बाद ही JDU में पहली टूट होगी।

चिराग ने मुख्यमंत्री के ऊपर आरोप लगाते हुए सीधे तौर पर कहा कि जब मेरे पिता जिंदा थे तो नीतीश कुमार ने एक-दो बार नहीं, कई बार उनकी पार्टी को तोड़ा। उनकी राजनीतिक हत्या की साजिश बार-बार रचते रहे। चाचा सभी बातों को जानते हैं। इसके बाद भी वो उस नीतीश कुमार की गोद में जाकर बैठ गए, जिन्होंने मरने के बाद भी उनके भाई और मेरे पिता को श्रद्धांजलि नहीं दी। रामविलास पासवान के निधन को 9 महीने भी नहीं हुए कि अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए पार्टी और परिवार को ही तोड़ दिया। पिता जी ही चाहते थे कि लोजपा अकेले चुनाव लड़े और हमने लड़ा।

विदित हो कि लोजपा में 13 जून की शाम से कलह शुरू हुई थी। 14 जून को चिराग पासवान को छोड़ बाकी पांचों सांसदों ने संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई थी। इसमें हाजीपुर सांसद पशुपति कुमार पारस को संसदीय बोर्ड का नया अध्यक्ष चुन लिया गया। इसकी सूचना लोकसभा स्पीकर को भी दे दी गई। 14 जून की शाम तक लोकसभा सचिवालय से उन्हें मान्यता भी मिल गई थी। इसके बाद चिराग पासवान ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर पांचों बागी सांसदों को लोजपा से हटाने की अनुशंसा कर दी। पटना में पारस गुट की बैठक में 17 जून को पारस को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *