रोहतास (बिहार)। बिलकिस बानो के बलात्कारियों की रिहाई के खिलाफ भाकपा माले के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को रेलवे परिसर होते हुए पोस्ट ऑफिस चौक तक प्रतिवाद मार्च निकाला। प्रतिवाद मार्च पोस्ट ऑफिस चौक पर जाकर सभा में तब्दील हो गया।
भाकपा माले के जिला सचिव नंद किशोर पासवान ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कहा कि देश में सांप्रदायिक फासीवाद की सरकार, सरकारी एजेंसी का लगातार दुरुपयोग कर रही है। जिसका ताजा उदाहरण बिलकिस बानो के बलात्कारियों एवं सांप्रदायिक हिंसा के दोषियों को रिहा करना है। यह सरकार देश के अंदर अपने को टिकाए रखने के लिए सांप्रदायिक दंगा करती है। सरकार लोकतंत्र को खत्म करने पर तुली हुई है। जरूरत है इस सांप्रदायिक ताकतों को जवाब देने की । सरकार एक तरफ नारी सम्मान की बात करती है, तो दूसरी तरफ बलात्कारियों एवं सांप्रदायिक हिंसा के दोषियों को रिहा करती है।
माले नेताओं ने कहा कि वर्ष 2002 में गोधरा में ट्रेन जलाने की घटना के बाद हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान गुजरात के दाहोद जिले के राधिकपुर के बिलकिस के साथ दंगाइयों ने सामूहिक बलात्कार किया था। उस समय वह 21 वर्ष की थी और 5 महीने की गर्भवती थी। उसके परिवार के सात सदस्यों की दंगाइयों ने हत्या कर दी थी। दोषियों को इस मामले में वर्ष 2008 में उम्र कैद की सजा हुई थी लेकिन गुजरात सरकार ने दोषियों को राज्य में लागू रिहाई नीति के तहत 15 अगस्त 2022 को छोड़ दिया। यह लोकतंत्र के खिलाफ है। भाकपा माले इसका जमकर विरोध करती है।
सभा में मुख्य रूप से अशोक सिंह, राजेंद्र सिंह, शशि जी, जवाहर लाल सिंह, केसर नेहाल, चंद्रधन सिंह, भैयाराम पासवान, अजय लाल, नरेंद्र राय, गोपाल राम, नागेंद्र चौधरी, मदन सिंह, जयराम कुरेशी व मारकंडे जी शामिल थे।