रोहतास (बिहार)। सम्राट अशोक का 2300 साल पुराना शिलालेख अतिक्रमण से मुक्त हो गया है। सम्राट अशोक के 23 सौ साल पुराने शिलालेख को अवैध कब्जे से मुक्त कराने में 23 साल लग गए।
जानकारी हो कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षित स्मारक को अतिक्रमण कर मजार बना दिया गया था। इस पर चादर चढ़ाई जाती थी। शिलालेख पर चूना लगाकर इसे नष्ट करने की कोशिश भी की गई। 23 साल बाद ये अतिक्रमण से मुक्त हुआ है। ASI के अधिकारियों को इसकी चाबी मंगलवार को सौंप दी गई है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने इसकी जानकारी अपने अधिकारिक ट्वीटर हैंडल पर ट्वीट कर दी है। बताया गया है कि सासाराम में सम्राट अशोक के लघु शिलालेख को लंबे समय तक अतिक्रमण किया गया था। साइट की चाबी जो एक संरक्षित स्मारक है, जिला प्रशासन के अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों को सौंप दी गई।
बता दें कि बिहार में अपनी तरह का यह एकमात्र शिलालेख दो दशकों से ज्यादा समय तक अतिक्रमणकारियों की कैद में था। पुरातत्व विभाग के इस संरक्षित स्थल पर लगाए गए बोर्ड को भी अतिक्रमणकारियों ने उखाड़ कर फेंक दिया था। यहां तक कि शिलालेख पर चुना पोतकर कर उसे नष्ट करने की भी कोशिश की गई। इस ऐतिहासिक शिलालेख के आगे लोहे का गेट लगा दिया गया था। पुरातत्व द्वारा बार-बार मांगने पर भी उसकी चाबी नहीं दी जा रही थी। कई बार विभाग ने जिला प्रशासन को इसके लिए लिखा, लेकिन शिलालेख मुक्त नहीं हो सका था।
इस मामले में अवैध कब्जे को लेकर दो दशकों तक मुद्दा गरमाता रहा, बीते दिनों एक बार फिर मुद्दा गरमाया और नेता प्रतिपक्ष सम्राट चौधरी ने सासाराम पहुंचकर धरना-प्रदर्शन कर डीएम को ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद जिला प्रशासन ने भी दबाव बढ़ाया, तब जाकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारी को 23 साल बाद चाबी मिल पाई है।